राजिक फर्शीवाला का भाजपा छोडऩा दुर्भाग्यपूर्ण
January 24, 2020 • धर्मेंद्र शुक्ला

 

राजिक फर्शीवाला का भाजपा छोडऩा दुर्भाग्यपूर्ण

- राधेश्याम भाई साहब,सोमानीजी और पीयूष ने उन्हें मनाना चाहिए

कांग्रेस के जिन प्रमुख नेताओं ने अंतरसिंह दरबार की कार्यशैली से  पीडि़त होकर कांग्रेस छोड़ी थी,उनमें बेहद लोकप्रिय छात्र नेता रहे जिला भाजपा उपाध्यक्ष रामकिशोर शुक्ला भैय्याजी के अलााव अशोक जायसवाल,गुलाब राजौरा,अमित वर्मा के अलावा राजिक फर्शीवाला उल्लेखनीय नाम थे। इनमें से भैय्याजी तो महान जनप्रतिनिधि स्व.भेरूलाल पाटीदार के समक्ष भाजपा में आए थे। लेकिन अन्य उल्लेखित नेता कैलाश विजयवर्गीय के सामने भाजपा में शामिल हुए थे।  पिछले विधानसभा चुनाव में हालांकि वे महू विधानसभा की बजाय आकाश विजयवर्गीय के लिए तीन नंबर विधानसभा में सक्रिय थे,लेकिन महू में उन्होंने उषा दीदी के लिए निगेटिव कुछ नहीं किया। ये अलग बात है कि उनके निवास स्थान वाले बूथ पर भाजपा को उतने भी वोट नहीं मिले थे,जितना बड़ा उनका खुद का निजी और मित्र परिवार है।  जाहिर है नरेंद्र मोदी और अमित शाह की आक्रमक राजनीति के चलते भाजपा के मुस्लिम नेता अपने ही समुदाय में बेगाने से हो गए थे। राजिक फर्शीवाला मूलत:कसाई मुस्लिम समाज के हैं। इनका परिवार शेखावटी राजस्थान का है। महू में शायद बहुत कम लोगों को यह बात पता होगी कि इनके परिवार में यह परंपरा सी रही है कि कुर्बानी में सिर्फ छोटे जानवरों की बलि दी जाती रही है। यानी फर्शीवाला परिवार में पीढिय़ों से गोकशी की परंपरा नहीं है। यही वजह है कि राजिक फर्शीवाला ने अनेक बार महू की गोशाला में सेवा की है। यहीं नही महू के इतिहास मे ंगो रक्षा के संकल्प के साथ मुस्लिम युवाओं का जुलूस पहला जुलूस राजिक के नेतृत्व में ही निकला है। राजिक भाई को नाचीज से अधिक महू में दीपक भैय्या जाजू  योगेश भैय्या(यादव) जानते हैं। इन्हें मालूम है कि परिष्कार से साथ सलीके से पेश आना उनकी शख्सियत है। सात रास्ते पर 13 अप्रैल को होने वाले बड़े आयोजन के मुख्यअतिथि अनेक बार आकाश विजयवर्गीय और अन्य नेता रहे हैं। ऐसे में उन्हें प्रदेश भाजपा प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के सहसंयोजक और मुझे स्वयंसेवक बनाने वाले शांतिलाल यादव के अग्रज राधेश्याम भाई साहब ने उन्हें मनाना चाहिए। जिला अध्यक्ष अशोक सोमानी और केजी माहेश्वरी भाजपा मंडल महू नगर के ऊर्जावान युवा अध्यक्ष पीयूष अग्रवाल ने भी उनसे  व्यक्तिगत मतभेद भूलकर चर्चा करनी चहिए। हालांकि नाचीज तो तब भी उनसे असहमत था,जब उन्होंने कांग्रेस छोड़ी थी। इसका कारण कांग्रेस में वे सीधे विक्रांत भूरिया और जयवर्धनसिंह तक सीधी पहुंच रखते थे। प्रदेश सेवादल के तत्कालीन अध्यक्ष योगेश यादव तो खैर उन्हें अपना छोटा भाई मानते ही थे। जो भी हो राजिक भाई हो सके तो अपने फैसले पर फिर से विचार करें यहीं नाचीज की इल्तजा है। जिला और नगर भाजपा के कर्णधारों से नाचीज की यही अपील है कि वे भाजपा के अन्य मुस्लिम नेताओं यथा वरिष्ठ नेता सलाम भाई मेहर,युवा नेता साहिल मेहर,मेहमूद सेठ, शमीम बानो से लगातार संपर्क में रहें और यदि उन्हें नागरिकता संशोधन कानून के संदर्भ में कोई गलतफहमी हो तो दूर करे।