“युवाओं को बेहतर नौकरी दिलवाना शैक्षणिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है ताकि वे राष्ट्र निर्माण में सहयोग कर सकें”- डॉ. एस.बी. मुजुमदार
November 30, 2019 • धर्मेंद्र शुक्ला

“युवाओं को बेहतर नौकरी दिलवाना शैक्षणिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है

ताकि वे राष्ट्र निर्माण में सहयोग कर सकें”- डॉ. एस.बी. मुजुमदार

·         देश की पहली स्किल यूनिवर्सिटी के फाउंडर पद्मभूषण डॉ. एस.बी. मुजुमदार ने पहले दीक्षांत समारोह के पूर्व किया संबोधित

·         सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी ऑफ़ एप्लाइड साइंसेस, इंदौर का पहला दीक्षांत समारोह रविवार को होगा आयोजित

·         राज्यपाल माननीय श्री लालजी टंडन करेंगे अध्यक्षता, उच्चशिक्षा मंत्री जीतू पटवारी होंगे विशेष अतिथि

इंदौर, 30 नवंबर 2019। “आज देश एक गंभीर समस्या के दौर से गुजर रहा है। कई आयामों के कारण देश में नौकरियां कम होती जा रही हैं। युवाओं के लिए नौकरियां उपलब्ध करवाने और उन्हें बेहतर नौकरी दिलवाने की सख्त आवश्यकता है। देश के हर युवा को एक सम्मानजनक नौकरी मिलनी चाहिए ताकि वे समाज में बेहतर स्तर का जीवनयापन कर सकें और इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण ये कि वे राष्ट्र के निर्माण में सहयोग कर सकें। ये देश के शैक्षणिक संस्थानों की नैतिक जिम्मेदारी है कि युवाओं को ऐसी शिक्षा दें जिससे वो रोजगार हासिल कर सकें। कौशल विकास एक ऐसी कला है जो आने वाले समय की जरूरत है। इसके अलावा युवाओं को इनोवेटर भी बनाना होगा। उन्हें नया सोचने और उस नई सोच को पूरा करने के लिए भी तैयार करना होगा। ये जिम्मेदारी भी देश के महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों पर है।“

वर्तमान शिक्षा प्रणाली और उसकी जरूरतों के विषय में ये बातें देश के जाने माने शिक्षाविद पद्मभूषण डॉ. एस.बी. मुजुमदार ने शनिवार को देश की पहली स्किल यूनिवर्सिटी, सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेस (एसयूएएस) इंदौर में कही। वे एसयूएएस के पहले दीक्षांत समारोह की पूर्व आयोजित प्रेसवार्ता में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान एसयूएएस इंदौर की प्रो चांसलर डॉ. स्वाति मुजुमदार और वाइस चांसलर डॉ. संजय कुमार भी मौजूद थे।

शिक्षा व्यवस्था के बारे में डॉ. मुजुमदार ने आगे कहा- भारत में उच्चशिक्षा की शुरुआत मैकाले ने की थी। उन्होंने 1857 में दिल्ली, कलकत्ता और मद्रास में तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों की स्थापना की थी। उस समय की शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अच्छे क्लर्क तैयार करना था जो ब्रिटिश राज को बेहतर तरीके से चलाने में अंग्रेजों की मदद कर सकें। आजादी के बाद शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए कई कमिशन बनाए गए। पहले तीन कमिशन का मकसद उच्चशिक्षा को सुधारने के साथ ही एक नया ढांचा बनाना था। आज हमारे देश में एक हजार यूनिवर्सिटी, पचास हजार कॉलेज और 4 करोड़ छात्र हैं लेकिन इनमें मैकाले की व्यवस्था की झलक मिलती है। हमें समाज की जरूरतों के मुताबिक शिक्षा व्यवस्था को बदलने की जरूरत है। युवाओं को कुशल बनाना होगा। इसके लिए शिक्षण संस्थाओं और उद्योगों को भी साथ आना होगा।

पत्रकारवार्ता के दौरान दीक्षांत समारोह की जानकारी देते हुए डॉ. स्वाति मुजुमदार ने कहा-देश की पहली स्किल्ड यूनिवर्सिटी, सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेस अपना पहला दीक्षांत समारोह आयोजित करने जा रही है। रविवार 1 दिसंबर 2019 को सुपर कॉरिडोर स्थित यूनिवर्सिटी कैंपस में होने वाले गरिमामय समारोह की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के राज्यपाल माननीय श्री लालजी टंडन करेंगे। इस अवसर पर मप्र शासन के उच्चशिक्षा और खेल मंत्री श्री जीतू पटवारी विशेष अतिथि के तौर पर उपस्थित रहेंगे। समारोह में बीबीए और एमबीए कोर्स के करीब 137 छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान की जाएगी। ये छात्र रिटेल मैनेजमेंट और बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेस, इंवेस्टमेंट और इंश्योरेंस मैनेजमेंट के छात्र है।

वाइस चांसलर डॉ. संजय कुमार ने पत्रकार वार्ता की शुरुआत करते हुए कहा कि- आज के समय में छात्रों को आगे रखने के लिए यूनिवर्सिटी हर तरह के प्रयास करती है। यही नहीं हर 6 महीनों में यूनिवर्सिटी अपने पाठ्यक्रम को भी नया करती है ताकि यहां के छात्र आने वाले समय की जरूरतों के मुताबिक अपने आप को तैयार कर सकें। दीक्षांत समारोह में फाउंडर और चांसलर पद्मभूषण डॉ. एस.बी. मुजुमदार और यूनिवर्सिटी की प्रो चांसलर डॉ. स्वाति मुजुदार सहित शहर के कई गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10.30 बजे होगा।