*मरीज से आधे घंटे पहले पहुंचा कटा हुआ हाथ,4 घण्टे की सर्जरी कर जोड़ा*
November 28, 2019 • धर्मेंद्र शुक्ला

  *मरीज से आधे घंटे पहले पहुंचा कटा हुआ हाथ,4 घण्टे की सर्जरी कर जोड़ा*

 *तीन घंटों अंदर कटे हुए अंग को लेकर अस्पताल पहुंच जाए तो दोबारा जुड़ सकता है कटा हुआ अंग*

_*- शहर के डॉक्टर्स ने हाल ही में दुर्घटना के दौरान मरीज के कटे हुए हाथ को दोबारा जोड़ा*_

*इंदौर।* 22 वर्षीय शानु (परिवर्तित नाम) के सर पर पिता का साया नहीं है और वह अपने परिवार में अकेला कमाने वाला है। 22 नवम्बर को एक दुर्घटना में उसका सीधा हाथ कोहनी के नीचे से कट गया। साथियों ने समझदारी दिखाई और सीधे डॉक्टर को फ़ोन लगाकर कटे हुए हाथ और मरीज को सही तरीके से अस्पताल तक पहुंचाने का तरीका पूछा। दुर्घटना के 45 मिनिट के अंदर ही सांवेर से शानु का कटा हुआ हाथ उससे पहले अस्पताल पहुंचा दिया गया और उसके 15 मिनिट बाद शानु को भी अस्पताल ले आया गया। सारी जांचे होने के बाद 7.15 बजे उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर सर्जरी शुरू कर दी गई। डॉक्टर्स ने ऑपरेशन करके सिर्फ शानु का हाथ ही नहीं जोड़ा बल्कि आने वाली ज़िंदगी को लेकर टूटी उम्मीदों को भी दोबारा जोड़ दिया। इस सर्जरी को सफलतापूर्वक करने वाले प्लास्टिक एंड माइक्रोवैस्कुलर सर्जन डॉ निशांत खरे कहते हैं कि अमूमन इस तरह के केसेस में लोग कटे हुए अंग को सही तरीके से और सही समय पर अस्पताल लेकर नहीं आते इसलिए सर्जरी करके अंग को फिर जोड़ना कठिन हो जाता है। यदि मरीज के शरीर के किसी भी कटे हुए अंग को 3 घंटे के अंदर बर्फ में रखकर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसे जोड़ा जा सकता है। यह ध्यान रखना जरुरी है कि अंग को सीधे बर्फ के संपर्क में ना रखते हुए पॉलीथिन में रखना चाहिए। सीधे बर्फ के संपर्क में आने पर अंग गलने लगेगा। 6 घंटे के अंदर अंग यदि शरीर से जुड़ जाए तो वह पहले की तरह काम करने लग सकता है पर इस तरह के ऑपरेशन की तैयारी में समय लगता है इसलिए मरीज को हर हाल में तीन घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया जाना चाहिए। हम यही जागरूकता बढ़ाना चाहते हैं मरीज के कटे हुए अंग को पानी संक्रमण से बचाकर पॉलीथिन  से कवर कर बर्फ में रखकर यदि 3 घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो अंग को दोबारा जोड़ा जा सकता है।

*डॉक्टर्स की इस टीम ने किया यह कमाल*
डॉक्टर निशांत खरे प्रख्यात प्लास्टिक एवं माइक्रो वैस्कुलर सर्जन की अगुवाई में ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ संदीप अग्रवाल, डॉ ज़ुबिन सोनाने, डॉ आशीष अग्रवाल और डॉ ज्ञानेश पाटीदार की टीम ने मिलकर इस सर्जरी को सफलतापूर्वक किया। शानु के परिजन ने कहा कि जब हमें इस दुर्घटना के बारे में पता लगा तो हमारे होश ही उड़ गए थे। सिर्फ 22 साल का है शानु, उसकी पूरी ज़िंदगी ख़राब हो जाती पर डॉ खरे और उनकी टीम ने सिर्फ उसका हाथ नहीं बल्कि पूरी ज़िंदगी बचाई है। अब शानु पूरी तरह ठीक है।

*अंग भंग की स्थिति में इन बातों का रखें ध्यान -*
_- कटे हुए अंग को जल्दी से साफ़ प्लास्टिक बैग में रखकर उस बैग को बर्फ में रख दें, सीधे बर्फ़ के सम्पर्क में ना रखे।_
_- बहते हुए खून को रोकने के लिए घाव या नसों को कसकर बांध दें।_
_- तुरंत प्राथमिक चिकित्सालय जाए।_
_- 6 घंटे के अंदर किसी बड़े अस्पताल में पहुंच कर रिप्लान्टेशन सर्जरी करवाए।_