* मानवीयता का अनुकरणीय उदाहरण* *एस पी पश्चिम जैन बने जूनी इंदौर थाना प्रभारी के लिए संकट मोचक*
April 16, 2020 • धर्मेंद्र शुक्ला

 

 

* मानवीयता का अनुकरणीय उदाहरण*
*एस पी पश्चिम जैन बने जूनी इंदौर थाना प्रभारी के लिए संकट मोचक*

* अनिल भंडारी ( पुलिसवाला पत्रिका ) की कलम से*

*इंदौर शहर में पदस्थ एस पी पश्चिम महेशचंद्र जैन अपने अधिनस्थों के प्रति सहानुभूति का भाव रखते हैं । मंगलवार को इन्होंने उदारता , सहिष्णुता एवं अपनी वरिष्ठता का परिचय देते हुए थाना प्रभारी के उपचार के लिए अपने ए टी एम से 32 हज़ार रुपये निकाल कर दे दिए* ।
*सूत्रों के अनुसार महेशचंद्र जैन प्रतिदिन नियमित रूप से उपचाररत पुलिसकर्मी का कुशलक्षेम पूछते हैं*।

*हालिया मामले में , कोविड-19 से ग्रसित थाना प्रभारी के इलाज हेतु मंहगे इंजेक्शन को क्रय करने के लिये रुपया एकत्रित कर रहे थे पुलिसकर्मी। इस बात की भनक पुलिस अधीक्षक को लगते ही उन्होंनें स्वयं के एटीएम से रूपये निकालकर  उपचाररत  थाना प्रभारी इंजेक्शन इत्यादि उपलब्ध करा दिए*।
 *जूनी इंदौर थाना प्रभारी  देवेन्द्र कुमार COVID-19 से ग्रसित हैं तथा वर्तमान में अरविन्दों अस्पताल में भर्ती होकर उपचाररत  हैं जिनकी हालत स्थिर बनी हुई है*। 
 *देवेंद्र कुमार के उपचार के दौरान डाक्टर्स की टीम को एक इंजेक्शन की आवश्यकता हुई जिसकी बाज़ार में कीमत 50 हजार रुपये थी। थाना स्टॉफ  इंजेक्शन को क्रय करने हेतु चिंतित था अतः वह परस्पर रुपये एकत्रित करने का विचार बना रहे थे, ठीक उस समय पुलिस अधीक्षक पश्चिम  महेश चन्द्र जैन भ्रमण करते हुए थाना परिसर पँहुचे जिन्हें इंजेक्शन क्रय किये जाने हेतु स्टॉफ द्वारा पैसे एकत्रित करने की भनक लगी। उन्होंने सहृदयता एवं उदारता का परिचय देते हुए तुरंत अपने एटीएम कार्ड के जरिये एटीएम मशीन से रुपये  निकालकर इंजेक्शन क्रय करने हेतु निर्देशित किया।
डीलर से चर्चा करने पर वह लागत कीमत  32 हजार रूपये में इंजेक्शन देने को तैयार हो गया। चॅूकि दवा बाजार में उक्त इंजेक्शन की मांग अधिक होने से उपलब्धता कम है अतः एस पी जैन ने भविष्य में इसकी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुये दो इंजेक्शन क्रय करवा लिये तथा एक इंजेक्शन तत्काल अरविन्दों अस्पताल में डाक्टर्स की टीम के पास भेज दिया जिसका उपयोग वहाँ इलाजरत देवेन्द्र कुमार के लिए किया जाना था,। 
 *एस पी जैन अस्पताल में भर्ती प्रत्येक पुलिसकर्मी से दिन में दो से तीन बार मोबाइल द्वारा बात कर उनका स्वास्थ्य संबंधी हालचाल जान रहे हैं। इन्होंने  सभी पुलिस जवानों को भरोसा दिलाया कि किसी भी विषम परिस्थिति में पुलिस विभाग सदैव उनके साथ खड़ा है। गौरतलब है कि शहर के अनेक वरिष्ठ जनों के इलाज और दवा-गोली की व्यवस्था भी वे करते हैं। यही नहीं पुलिस अधीक्षक जैन की मित्र मंडली उनके नेतृत्व में रोजाना लगभग पाँच हजार लोगों के खाने की व्यवस्था भी करवा रही है*।
*ऐसे परोपकार के अनुकरणीय  उदाहरण बिरले ही देखने को मिलते हैं* ।