*इंदौर शहर में एक लाख स्मार्ट मीटर स्थापित* *चुनिंदा फीडरों का लाइन लास 10 फीसदी तक घटा वहीं आपूर्ति 5 मिनट बढ़ी*
November 22, 2019 • धर्मेंद्र शुक्ला

*इंदौर शहर में एक लाख स्मार्ट मीटर स्थापित*
*चुनिंदा फीडरों का लाइन लास 10 फीसदी तक घटा वहीं आपूर्ति 5 मिनट बढ़ी*
*केंद्र सरकार, 15 राज्यों के अलावा जर्मनी के दल ने देखी खासियतें*
इंदौर 21 नवम्बर 2019
  शहर में स्मार्ट मीटर योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा हैं। अब तक एक लाख स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। पहले चरण में कुल 1-25 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जाना हैं। यह काम दिसंबर अंत तक हो जाएगा। रेडियो फ्रीक्वैंसी तरीके से लगाए गए स्मार्ट मीटर से एक ओर जहां लाइन लास घटा हैं, वहां आपूर्ति व्यवस्था भी सुधरी हैं।
 मप्रपक्षेविविकं के प्रबंध निदेशक श्री विकास नरवाल ने बताया कि स्मार्ट मीटरों की स्थापना का काम दिसंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। अभी 1 लाख 300 मीटर स्थापित हो चुके हैं। शेष मीटर नवंबर के शेष दिनों के अलावा दिसंबर माह में लगा दिए जाएंगे। इन मीटरों की खासियत यह हैं कि कंपनी को जरूरत होने पर 15-15 मिनट की रीडिंग भी प्राप्त हो सकती हैं। मीटर बिजली जाने की सूचना भी कंट्रोल रूम दे देते हैं, इस सूचना से मानिटरिंग हो रही हैं। फलतः आपूर्ति व्यवस्था में और सुधार हुआ हैं। शहर की औसत आपूर्ति पांच मिनट रोज बढ़कर 23.50 घंटे तक हो गई हैं। वहीं 40 फीडरों का लाइन लास भी औसतन 10 फीसदी तक घटा हैं। श्री नरवाल ने बताया कि कंपनी के ऊर्जस एप पर स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ता अपनी दैनिक, सप्ताहिक, मासिक व वार्षिक खपत का रिकार्ड स्वयं देख सकते हैं। इस एप पर स्मार्ट मीटर संबंधी जल्दी ही अन्य सुविधाएं भी जोड़ी जाएगी। श्री नरवाल ने बताया कि देश के 15 राज्य़ों/ बोर्ड, बिजली कंपनियों व केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय, जर्मनी से दल स्मार्ट मीटर की खासियतें जानने एवं एक साल में स्मार्ट मीटर से बिजली सुधार कार्य को देखने आ चुके हैं। स्मार्ट मीटर के सभी उपभोक्ताओं की रीडिंग आटोमेटिंक 1 तारीख को कंट्रोल रूम आ जाती हैं। इस तरह से मीटर रीडरों की निर्भरता भी खत्म हो गई हैं। रीडिंग ज्यादा, कम होने के आरोप प्रत्यारोप लगना भी समाप्त हो चुके हैं।
        *पृथक अधीक्षण यंत्री की पदस्थापना*
 मप्रपक्षेविविकं प्रबंध निदेशक श्री नरवाल ने बताया कि स्मार्ट मीटर की अलग से सेल बनाई गई हैं। इसमें पृथक से अधीक्षण यंत्री स्तर के अधिकारी श्री डीएस चौहान को प्रभारी बनाया गया हैं। इसके साथ ही तीन-चार इंजीनियर और नोडल अधिकारी के तौर पर कार्य कर रहे हैं।