अर्थव्यवस्था में आई गिरावट, मंदी, बेरोजगारी और रूपये की कीमत गिरने, से प्रधानमंत्री की गरिमा रसातल में पहुंची   अपने उद्योगपति मित्रों की मदद हेतु, देश के हितों की बलि ले रहे हैं मोदी : शोभा ओझा
September 4, 2019 • धर्मेंद्र शुक्ला

  अर्थव्यवस्था में आई गिरावट, मंदी, बेरोजगारी और रूपये की कीमत गिरने, से प्रधानमंत्री की गरिमा रसातल में पहुंची

  अपने उद्योगपति मित्रों की मदद हेतु, देश के हितों की बलि ले रहे हैं मोदी : शोभा ओझा

मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने आज जारी अपने बयान में कहा कि देश को 5 ट्रिलियन डाॅलर इकाॅनाॅमी बनाने का झूठा ख्वाब दिखाने वाली मोदी सरकार के पूरे कार्यकाल में देश की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो गई है, हालात ये हैं कि देश आज बर्बादी की कगार पर खड़ा है, उद्योग धंधे ठप्प पड़े हैं, विकास अवरूद्ध है और बेरोजगारी अपने चरम पर है, यूपीए सरकार के समय जीडीपी की जो विकास दर 8 से 10 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, वह अब सिमटकर 5.8 पर पहुंच गई है, देश ने इतने भयानक आर्थिक हालातों का कभी सामना नहीं किया था। साफ है कि अपने उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए पूरी तरह से जुटी मोदी सरकार, आम आदमी के हितों की बलि लेने पर उतारू है।

आज जारी अपने वक्तव्य में केन्द्र की मोदी सरकार पर उपरोक्त गंभीर आरोप लगाते हुए श्रीमती शोभा ओझा ने आगे कहा कि बैंकिग, आॅटोमोबाइल, ट्रांसपोर्ट आदि सभी सेक्टरों में भारी मंदी के कारण बेरोजगारों की बाढ़ सी आ गई है। बीएसएनल, एलआईसी, रेलवे, एयरलाइंस, स्टैट बैंक आदि आज बर्बादी की कगार पर खड़े हैं। ओएनजीसी को रिलायंस के हितों को साधने के लिए चूसा जा रहा है और देश के छह हवाईअड्डों को मोदी सरकार ने अपने ''क्रोनी कैपिटलिस्ट'' मित्र गौतम अडानी को दे दिया है।

केन्द्र की मोदी सरकार पर उक्त आरोप लगाते हुए श्रीमती शोभा ओझा ने अपने बयान के अंत में कहा कि भाजपा के नेता यूपीए सरकार के समय, रूपये की कीमत गिरने को प्रधानमंत्री की गरिमा से जोड़ते थे, आज जब रूपया एक डाॅलर के मुकाबले 72 रूपये तक पहुंच गया है तब उनके प्रधानमंत्री मोदी की गरिमा आज किस रसातल में पहुंच गई है, देश इस बात का जवाब जानना चाहता है?